शब्द सारथी
Saturday, October 23, 2021
याद
तेरी यादों में जर्रा-जर्रा रहने लगा हूँ मैं।
तू कहती नहीं, बहुत कुछ कहने लगा हूँ मैं।।
दिल के दरख़्त पर , अरमान रख दिये सारे।
तेरी यादों के किस्से हैं, जिनमें बहने लगा हूँ मैं।।
आकाश राघव
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)